Afghanistan में भूकंप ने तबाही मचाई: सोमवार देर रात से मंगलवार सुबह तक अफ़ग़ानिस्तान में लगातार पाँच भूकंपों की एक श्रृंखला ने देश को हिलाकर रख दिया। स्थानीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार, अब तक 500 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हैं। मृतकों की संख्या लगातार बढ़ने की आशंका है।

Afghanistan में भूकंपों की समयरेखा
- पहला झटका – 1 सितंबर 2025, 12:47 AM, तीव्रता 6.3, गहराई 160 किमी
- दूसरा झटका – 1:08 AM, तीव्रता 4.7, गहराई 140 किमी
- तीसरा झटका – 1:59 AM, तीव्रता 4.3, गहराई 140 किमी
- चौथा झटका – सुबह 3:03 बजे, तीव्रता 5.0, गहराई 40 किमी
- पांचवां भूकंप – सुबह 5:16 बजे, तीव्रता 5.0, गहराई 10 किमी
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भूकंप के झटके कहां महसूस किये गये?
भूकंप का केंद्र अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के पास था। नांगरहार और कुनार प्रांतों में भूकंप के झटके सबसे ज़्यादा विनाशकारी साबित हुए। यहाँ कई इमारतें ढह गईं और भारी तबाही की तस्वीरें सामने आई हैं।

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जर्मन भूविज्ञान अनुसंधान केंद्र (जीएफजेड) और यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र (ईएमएससी) के अनुसार, भूकंप उथली गहराई (10-35 किमी) पर आया, जिससे झटके और भी तीव्र हो गए।
भूकंप के झटके सिर्फ़ अफ़ग़ानिस्तान तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि पाकिस्तान और भारत में भी महसूस किए गए। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोग रात भर दहशत में घरों से बाहर निकल आए।
भारी तबाही और राहत कार्य
नांगरहार और कुनार प्रांतों में सबसे ज़्यादा नुकसान की ख़बरें हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, कई गाँवों में इमारतें जमींदोज़ हो गई हैं।
रॉयटर्स और अल जजीरा की रिपोर्टों के अनुसार, मरने वालों की संख्या 500 से अधिक हो गई है। राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन लगातार आ रहे झटकों के कारण स्थिति और कठिन हो गई है।
हाल के बड़े भूकंप
पिछले कुछ हफ्तों में दुनिया के कई हिस्सों में तेज भूकंप दर्ज किए गए हैं। पिछले महीने रूस के कुरील द्वीप समूह के पास 6.0 तीव्रता का भूकंप आया था, 30 जुलाई को रूस के कामचटका प्रायद्वीप के पास 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई।
अफ़ग़ानिस्तान में आए इन झटकों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्राकृतिक आपदा के रूप में भूकंप कितना ख़तरनाक हो सकता है। भारत का उत्तरी भाग भूकंप-प्रवण क्षेत्र में आता है, इसलिए आपदा प्रबंधन और तैयारी बेहद ज़रूरी है।
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