Uttarakhand Ranji Trophy News, Mayank Mishra Uttarakhand, मयंक मिश्रा: उत्तराखंड क्रिकेट के लिए तब एक ऐतिहासिक पल बन गया जब बाएं हाथ के स्पिनर मयंक मिश्रा ने रणजी ट्रॉफी क्रिकेट में एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया जो आज तक किसी भी गेंदबाज ने हासिल नहीं किया! मयंक उत्तराखंड के लिए खेलते हुए रणजी ट्रॉफी में 150 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बन गए! इस उपलब्धि के साथ उन्होंने उत्तराखंड क्रिकेट के सबसे सफल गेंदबाजों में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
मयंक मिश्रा सिर्फ विकेट लेने वाले खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं। वह उत्तराखंड के घरेलू क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले पहले गेंदबाज भी हैं। ये कारनामा उन्होंने साल 2019 में गोवा के खिलाफ किया था. हालाँकि यह मुकाबला सैयद मुश्ताक अली टी-20 ट्रॉफी का था, लेकिन उस प्रदर्शन ने मयंक को खास पहचान दिलाई।
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अगर मयंक मिश्रा के रणजी ट्रॉफी करियर पर नजर डालें, तो आंकड़े खुद ही सब कुछ बयां करते हैं। उन्होंने एक पारी में आठ बार पांच विकेट और एक मैच में दो बार 10 विकेट लिए हैं। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के कारण वह उत्तराखंड टीम के सबसे भरोसेमंद स्पिन गेंदबाज बन गये हैं।
मयंक ने 2018 में मणिपुर के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में पदार्पण किया था। तब से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर सीजन में अपने प्रदर्शन से टीम को मजबूत किया है।
मयंक मिश्रा का लिस्ट ए करियर भी शानदार रहा है। उन्होंने अब तक 38 लिस्ट ए मैचों में 151 विकेट लिए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि मयंक न केवल लंबे प्रारूप में बल्कि क्रिकेट के सभी प्रारूपों में एक प्रभावी गेंदबाज हैं।
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रुद्रपुर के रहने वाले मयंक मिश्रा हल्द्वानी मै अभ्यास करते हैं। उनके क्रिकेटर बनने के पीछे उनके पिता का योगदान बेहद अहम है। एक समय ऐसा भी आया जब उत्तराखंड को स्टेडियम की मान्यता नहीं मिली और मयंक ने क्रिकेट छोडने का मन बना चुके थे। लेकिन उनके पिता ने उन्हें हिम्मत दी और क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। आज उसी विश्वास का नतीजा है कि मयंक राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं।
मयंक मिश्रा इंग्लैंड में कई वर्षों से प्रोफेशनल क्रिकेट भी खेल रहे है, और वहां का उनका अनुभव उनकी फिटनेस और गेंदबाजी दोनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। मयंक ने खुद कई बार कहा है कि इंग्लैंड में खेलने और अभ्यास करने से उन्हें पूरे साल फिट रहने में मदद मिलती है, जिसका फायदा उन्हें घरेलू क्रिकेट में मिलता है।
आज मयंक मिश्रा सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि उत्तराखंड क्रिकेट की नई पहचान बन गए हैं। उनका यह रिकॉर्ड आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है और यह साबित करता है कि मेहनत और धैर्य से बड़े सपने देखे जा सकते हैं।
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