हल्द्वानी (बेटी को न्याय दो): वर्ष 2014 के बहुचर्चित कशिश हत्याकांड में मुख्य आरोपी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद उत्तराखंड में गुस्से की लहर फैल गई है। गुरुवार को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क से सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और आरोपियों को फांसी देने की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें हुईं। स्थिति बिगड़ने की आशंका के चलते इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
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प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी
प्रदर्शनकारियों का कहना है, “उत्तराखंड की बेटी कशिश को न्याय नहीं मिला है। जब तक आरोपी को फांसी नहीं मिल जाती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।” इस आंदोलन को हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश, लोक कलाकार श्वेता महरा समेत कई सामाजिक, राजनीतिक और छात्र संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है।
क्या है कशिश हत्याकांड मामला?
20 नवंबर 2014 को पिथौरागढ़ निवासी मासूम कशिश हल्द्वानी में एक शादी समारोह के दौरान अचानक गायब हो गई थी। छह दिन बाद उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बच्ची के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या की गई थी।
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी अख्तर अली समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। मार्च 2016 में एक विशेष अदालत ने अख्तर अली को मौत की सज़ा सुनाई थी, जिसे 2019 में उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था।
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लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले से पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया है। उत्तराखंड सरकार ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला किया है।
फैसले का विरोध करने सड़कों पर उतरे लोगों का कहना है कि न्याय की उम्मीद के बावजूद, बेटी को न्याय नहीं मिला है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक आरोपी को फांसी नहीं मिल जाती, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।











